मैं समझा वो समझते होंगे

मैं समझा के वो समझते होंगे
जो इस दिल में है, वही उस दिल में भी
दिले अरमाँ उनके भी यूं भडकते होंगे ...

ये आग इक तरफा नहीं है
दिल है दोनों के जो बराबर दहकते होंगे
अक्सर मुझे नींद आती नहीं
रातों को जगकर शायद वो भी तड़पते होंगे ...

मैं समझा के वो समझते होंगे ... ॥

जब लेती होगी मेरा नाम दिल से
महकी सी हवा चलती होगी, ये बादल भी बरसते होंगे
मिलने को तनहाई में मुझसे
शायद यूं ही .. वो भी तरसते होंगे ...

मैं समझा के वो समझते होंगे ...॥
मैं समझा ............

मगर ...
मगर हकीकत तो यूं नहीं थी
मैं यूँ ही समझा के वो समझते होंगे
ये सब तो इक अफसाना था
वो तो बस मैं था जो दीवाना था

... बस मैं था ...
जो दीवाना था ... ॥

मगर तसल्ली रही के इक मैं ही दीवाना नहीं
आशिक और भी हैं जो तनहा भटकते होंगे
यार से मिलने की चाह में
बारहा उसकी गली से गुजरते होंगे .... ॥

मैं समझा ................ ॥

" अतुल "

5 comments:

Hitesh said...

Hi very well written !!!

excellent Work Dude...

Atul Sharma said...

Thanks Hitesh ji :)

LOVELY said...

aapki shayari hamesha dil ke kareeb hai

Atul Sharma said...

Thanks Lovely :)

Chanchal Singh said...

hEY ATUL KYA LIKHATE HO MERE BHAI,....BEST OF LUCK

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