मैं सही हूँ या ग़लत

उसको गुनाहगार की तरह तुम देखते हो
कभी ख़ुद को उसकी जगह बिठा कर देखो ...
तुम वो बन जाओ, उसे मैं बना दो
मैं सही हूँ या ग़लत ...
फिर फैसला सुना कर देखो ॥


" अतुल "

पगलाता जा रहा हूँ मैं

तुम्हे याद कर-कर के
खुद को ही भुलाता जा रहा हूँ मैं ..
लगता है की जैसे
पगलाता जा रहा हूँ मैं .... ॥

... वो हसीं सनम जिसे खुदा ने
बस मेरे लिये बनाया है
बादलों में इक
धुंधला सा चेहरा नज़र आया है ...
उस चेहरे से तुन्हारा चेहरा
मिलाता जा रहा हूं मैं ...

लगता है कि जैसे पगलाता जा रहा हूँ मैं ...॥

... तुमसे इश्क है
जी करता है सारे जहां को बता दूं मैं
बडी मुश्किल से इस दिल को
मनाता जा रहा हूँ मैं ...

... तेरी तस्वीर बन जाये शायद
रेत में उंगलियां
फिराता जा रहा हूँ मैं ...

लगता है कि जैसे पगलाता जा रहा हूँ मैं ...॥

... अक्सर सोचता हूँ
ये क्या लिख रहा हूँ
क्यों लिख रहा हूँ मैं ..

क्या बताऊँ जब
खुद को ही नहीं समझा पा रहा हूँ मैं ...
... यही सच है शायद ...

कि पगलाता जा रहा हूं मैं ...॥

" अतुल "

बस तुम

मैं तुमपे गीत कहता था
तुम कहती थी शायरी सुनाओ ना
तुम्हारे रहते ना शायरी कर पाया मैं
मेरी ज़िदगी ही गज़ल बन गई .. तुम्हारे जाने के बाद ... ॥

दिल धड्कता है
आवाज़ सुनाई देती है तेरी ...
आईना देखता हूँ
तस्वीर दिखाई देती है तेरी ....

कौन कहता है नहीं हो तुम ...
मेरा दिल जानता है
यहीं-कहीं हो तुम ....

वादियों में .. इन पहाडों में
रातों को .. दिन के उजालों में
हर लमहा .. हर तरफ
तुम ही तुम ...
बस तुम ...॥
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तुम ही तुम
बस तुम

" अतुल "

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