उसको गुनाहगार की तरह तुम देखते हो
कभी ख़ुद को उसकी जगह बिठा कर देखो ...
तुम वो बन जाओ, उसे मैं बना दो
मैं सही हूँ या ग़लत ...
फिर फैसला सुना कर देखो ॥
" अतुल "
मेरी ज़िंदगी के पन्नों से ....... Poetry in Hindi by Atul Sharma.
" अतुल "
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