मुझे महोब्बत न करो

इक इल्तज़ा है तुमसे के मेरे दोस्त बन जाओ
और मुझे महोब्बत न करो
ये तमन्ना है के मेरी ज़िन्दगी में आओ
और मुझे महोब्बत न करो ...... ॥

सिवा तुम्हारे कुछ सोचूँ मैं नहीं
सोचता हूँ बता दूँ मगर
रूबरू जब तुम हो तो कुछ बोलूं मैं नहीं

काश ऐसा हो के मैं तुम, तुम मैं बन जाओ
और मुझे महोब्बत न करो ...... ॥
ये तमन्ना है के मेरी ज़िन्दगी में आओ
और मुझे महोब्बत न करो ...... ॥

अक्सर देखा है
महोब्बत को नाकाम होते हुए
साथ जीने के वादे किए
फिर तनहा रोते हुए .......

जो हमेशा साथ निभाए, वो तो बस दोस्ती है
जो कभी ना रूलाए, वो तो बस दोस्ती है
यूँ ही देखा है बचपन की दोस्ती को बूढा होते हूए
ना किए कभी वादे, पर हर वादे को पूरा होते हूए ..॥

ये तमन्ना है के मेरी ज़िन्दगी मे आओ
और मुझे महोब्बत न करो ...
इक इल्तज़ा है के मेरे दोस्त बन जाओ
और मुझे महोब्बत न करो ...... ॥
..................................
.......................
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यूँ ही ता उमर मेरा साथ निभाओ
और मुझे महोब्बत न करो ...... ॥

" अतुल "

6 comments:

Rati said...

well written atul
"mujhe mohabbat na karo" nice theme and nice thoughts u hav
keep writin
love you

Atul Sharma said...

Thanks Rati :o)

neha said...

bahut accha hai ..

SEO Consultant - Manoj Salwani said...

Wah Wah... Huzur Mar hi dalogee... kya likha ha aapne.

vese jo bhi likha ha mast likha ha.. bas dosti kar liziye per muhabt nahin. kun ki muhabt karne ke bad sidha shadi karni ko bolege is liye aapne likh dala ha ki dosti tak hi theek ha. :-)

Atul Sharma said...

@ Neha
Thanks :)

@ Manoj
Shukriya Huzur. bilkul sahi samjhe aap :).. ha ha

Just for Fun said...

here is the one.. fav cocktail companion ;-)

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