मैं सही हूँ या ग़लत

उसको गुनाहगार की तरह तुम देखते हो
कभी ख़ुद को उसकी जगह बिठा कर देखो ...
तुम वो बन जाओ, उसे मैं बना दो
मैं सही हूँ या ग़लत ...
फिर फैसला सुना कर देखो ॥


" अतुल "

2 comments:

mridula pradhan said...

ekdam sahi kahi .

Anonymous said...

nnice

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